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ओएसएच इंडिया 2025 प्रदर्शनी में श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर केंद्रित हुआ संवाद

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने किया उद्घाटन, उद्योगों की मजबूती और श्रमिक कल्याण के लिए कड़े सुरक्षा नियमों की वकालत

देश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ती जा रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में ‘ओएसएच इंडिया 2025’ प्रदर्शनी का आयोजन हुआ, जिसमें व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। इस प्रदर्शनी ने न केवल तकनीकी नवाचारों को प्रस्तुत किया, बल्कि नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर श्रमिक कल्याण के लिए ठोस समाधान तलाशने का अवसर भी दिया।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने उद्घाटन सत्र में कहा कि “हर श्रमिक का कल्याण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव है। उद्योगों की मजबूती तभी संभव है जब श्रमिक सुरक्षित, स्वस्थ और मानसिक रूप से संतुलित हों। इसके लिए कड़े और अनिवार्य सुरक्षा नियमों की आवश्यकता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।

प्रदर्शनी में 13 देशों के 300 से अधिक अग्रणी ब्रांडों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने 1,500 से अधिक उत्पादों के माध्यम से सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों को प्रदर्शित किया। इनमें एआई आधारित निगरानी प्रणाली, स्मार्ट हेलमेट, वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग उपकरण, और मानसिक स्वास्थ्य को ट्रैक करने वाले डिजिटल टूल्स शामिल थे। इन तकनीकों का उद्देश्य कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं को रोकना, कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाना और एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है।

इंफार्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मद्रास ने कहा, “भारत में कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर अब सोच बदल रही है। पहले जहां इसे एक अतिरिक्त खर्च माना जाता था, अब इसे एक निवेश के रूप में देखा जा रहा है। यह निवेश न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि उद्योगों की दीर्घकालिक स्थिरता को भी मजबूत करता है।”

प्रदर्शनी में मानसिक स्वास्थ्य को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कार्यस्थल पर तनाव, अवसाद और मानसिक थकावट अब आम समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में कंपनियों को चाहिए कि वे नियमित मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन, परामर्श सेवाएं और सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व को अपनी कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाएं।

इसके अलावा, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) की गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने चेताया कि महामारी के बाद PPE का उपयोग तो बढ़ा है, लेकिन इसके सही इस्तेमाल और प्रशिक्षण की कमी अब भी एक चुनौती बनी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनियों को कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षित करना चाहिए और उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण उपलब्ध कराने चाहिए।

सरकारी प्रतिनिधियों ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और उद्योग मिलकर सुरक्षा प्रशिक्षण, निरीक्षण और प्रोत्साहन योजनाएं लागू करें, तो कार्यस्थल पर सुरक्षा को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है।

शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी जैसे संस्थानों ने बताया कि अब इंजीनियरिंग और प्रबंधन पाठ्यक्रमों में सुरक्षा जागरूकता को शामिल किया जा रहा है, ताकि भविष्य के पेशेवर सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और ब्रह्माकुमारी जैसे सामाजिक संगठनों ने भी इस मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कार्यस्थल पर शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ भावनात्मक संतुलन और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।

ओएसएच इंडिया 2025 प्रदर्शनी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में कार्यस्थल सुरक्षा अब एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता बन चुकी है। यह आयोजन एक ऐसा मंच साबित हुआ, जहां विचारों का आदान-प्रदान हुआ, समाधान सामने आए और एक सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त भारत की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

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