सद्भावना वृद्धाश्रम ने घोषित किया 151 करोड़ वृक्षारोपण अभियान और विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क वृद्धाश्रम परिसर
पर्यावरण संरक्षण और वृद्धजन देखभाल को जोड़ते हुए संस्था ने हरित भारत और गरिमामय जीवन का संकल्प लिया

राजकोट स्थित सद्भावना वृद्धाश्रम ने एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की है, जिसमें पूरे भारत में 151 करोड़ पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया गया है। इसके साथ ही संस्था ने विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क देखभाल–आधारित वृद्धाश्रम परिसर विकसित करने की योजना भी प्रस्तुत की है। इन दोनों पहलों का उद्देश्य है—भारत को हरित बनाना और वृद्धजनों को गरिमामय जीवन प्रदान करना।

वृक्षारोपण अभियान: हरित भारत का संकल्प
सद्भावना वृद्धाश्रम ने पिछले दस वर्षों में 1.10 करोड़ पेड़ लगाए और उनकी देखभाल की है। इनमें 40 लाख संरक्षित पेड़ और 70 लाख पेड़ मियावाकी पद्धति से लगाए गए हैं। अब संस्था ने पूरे भारत में 151 करोड़ पेड़ लगाने और उन्हें संरक्षित करने का संकल्प लिया है।
इस अभियान का विशेष ध्यान महाराष्ट्र और गुजरात पर होगा। केवल महाराष्ट्र में प्रारंभिक चरण में 3 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे। गुजरात में संस्था सरकार, संस्थानों, दानदाताओं और स्वयंसेवकों के सहयोग से 150 वन विकसित करने की योजना बना रही है।
संस्था का मानना है कि पेड़ लगाना आसान है, लेकिन उनकी देखभाल करना कठिन। इसलिए यह पहल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पेड़ों की नियमित सिंचाई और संरक्षण की जिम्मेदारी भी संस्था स्वयं उठाएगी।
विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क वृद्धाश्रम परिसर
सद्भावना वृद्धाश्रम पहले से ही विश्व का सबसे बड़ा वृद्धाश्रम है, जिसमें 1,400 कमरे हैं और 5,000 से अधिक शारीरिक रूप से अक्षम एवं असहाय वृद्ध आजीवन निःशुल्क रह सकते हैं। अब संस्था ने राजकोट–जामनगर रोड स्थित रामपर में 400 करोड़ रुपये की लागत से नया परिसर बनाने की योजना बनाई है।
इस आधुनिक परिसर में सात 11-मंज़िला इमारतें होंगी। प्रत्येक टावर में 100 कमरे होंगे और हर मंज़िल पर खुली छत (टेरेस) होगी ताकि वृद्धजन घूम सकें। पूरा परिसर व्हीलचेयर-अनुकूल होगा और हर कमरे में प्रकाश, वायु और हरियाली का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
15 एकड़ में फैले इस परिसर में वृद्धजनों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं होंगी—मंदिर, अन्नपूर्णा भोजनालय, पुस्तकालय, व्यायाम कक्ष, योग हॉल, चिकित्सा केंद्र, उद्यान और सामुदायिक भवन। इसका उद्देश्य है कि वृद्धजन एक ही स्थान पर निःशुल्क जीवनयापन कर सकें और उन्हें गरिमामय देखभाल मिले।
वृद्धजन देखभाल का नया मानक
इस आधुनिक सुविधा में भारतभर से आने वाले लगभग 5,000 निर्धन, असहाय, गंभीर रूप से बीमार एवं परित्यक्त वृद्धों को आश्रय मिलेगा। इनमें मधुमेह, किडनी रोग, पक्षाघात, हृदयरोग, मानसिक विकार, दृष्टि-हीनता और अंग कटने जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त वृद्धजन शामिल होंगे।
संस्था का उद्देश्य है कि इन वृद्धजनों को न केवल आश्रय मिले, बल्कि प्रेम, सम्मान, सेवा और देखभाल भी प्राप्त हो—जो शायद उनके अपने घर में संभव नहीं हो पाई हो।
दान और सहयोग
नए वृद्धाश्रम परिसर के निर्माण हेतु लंदन स्थित विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिवार ने 108 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्था ने इस उदार सहयोग को वृद्धजन देखभाल की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
संस्था की अन्य गतिविधियाँ
सद्भावना वृद्धाश्रम केवल वृद्धजन देखभाल तक सीमित नहीं है। संस्था वृक्षारोपण, घायल एवं परित्यक्त बैलों के लिए बडाड आश्रम, डॉग शेल्टर, पशु अस्पताल और चिकित्सा सेवा जैसी गतिविधियाँ भी संचालित करती है। अब तक 40 लाख से अधिक स्थानीय प्रजातियों—नीम, पीपल, वट, उंबर, आंवला आदि—के पेड़ लगाए और संरक्षित किए जा चुके हैं।
निष्कर्ष
सद्भावना वृद्धाश्रम की ये दोनों पहलें—151 करोड़ वृक्षारोपण अभियान और विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क वृद्धाश्रम परिसर—भारत में सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण का नया मानक स्थापित करती हैं। यह केवल पेड़ लगाने या भवन बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टि है—हरित भारत और गरिमामय वृद्धजन जीवन की।
संस्था का संकल्प है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल हरित होगा, बल्कि वृद्धजन समुदाय को भी वह सम्मान और देखभाल मिलेगी, जिसके वे हकदार हैं। यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें प्रकृति और मानवता दोनों का ध्यान रखा जाए।



