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डैनोन इंडिया ने शुरू की राष्ट्रव्यापी पहल ‘आयरन अप!’

आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया से लड़ने के लिए स्क्रीनिंग, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी का व्यापक अभियान

भारत में आयरन की कमी और एनीमिया की समस्या लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के अनुसार, 6 से 59 महीने के लगभग 67% बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं वैश्विक शोध, जिसमें द लैंसेट की रिपोर्ट भी शामिल है, यह दर्शाता है कि एनीमिया भारतीय महिलाओं में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। इन चिंताजनक तथ्यों को देखते हुए, डैनोन इंडिया ने ‘आयरन अप!’ नामक राष्ट्रव्यापी पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया (आईडीए) की पहचान और रोकथाम को तेज़ करना है।

आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया पर फोकस

एनीमिया केवल शारीरिक कमजोरी का कारण नहीं है, बल्कि यह बच्चों की मानसिक क्षमता, सीखने की क्षमता और महिलाओं की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। आयरन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है, जिससे थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ‘आयरन अप!’ अभियान का लक्ष्य है कि इस समस्या को समय रहते पहचाना जाए और सही पोषण के माध्यम से इसे रोका जा सके।

बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग

डैनोन इंडिया पहले ही कई राज्यों में 8 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर चुका है। डिजिटल तकनीक और बिना दर्द वाली विधियों का उपयोग करके बच्चों में आयरन की कमी का शुरुआती पता लगाया जा रहा है। इससे माता-पिता और शिक्षकों को समय पर कदम उठाने में मदद मिल रही है। यह प्रयास बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चिकित्सकीय जागरूकता और आईडीए प्लेज

चिकित्सकीय समुदाय को जागरूक करने के लिए डैनोन ने आईडीए प्लेज अभियान शुरू किया है। इसके माध्यम से पूरे भारत के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से अपील की जा रही है कि वे आयरन की कमी की समय पर पहचान करें और पोषण आधारित रोकथाम को बढ़ावा दें। इस पहल का उद्देश्य है कि डॉक्टर, पोषण विशेषज्ञ और स्वास्थ्य कर्मी मिलकर एक संयुक्त प्रयास करें, ताकि परिवार आयरन की कमी को जल्दी पहचान सकें और उससे निपटने के लिए कदम उठा सकें।

डिजिटल पहल ‘डिसअपीयर्ड रेड’

डैनोन इंडिया ने सोशल मीडिया पर ‘डिसअपीयर्ड रेड’ नामक डिजिटल पहल भी शुरू की है। इसका लक्ष्य 25 मिलियन से अधिक लोगों तक पहुंचना है। यह अभियान तस्वीरों और कहानी कहने के माध्यम से दिखाता है कि आयरन की कमी दिमागी कार्यों को कैसे प्रभावित करती है और रोज़मर्रा की काम करने की क्षमता को कम करती है। इस पहल से लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे जल्दी स्क्रीनिंग कराएं और सही पोषण अपनाएं।

जमीनी स्तर पर जागरूकता

‘आयरन अप!’ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है स्कूलों और समुदायों में जागरूकता कैंप आयोजित करना। इन कैंपों का फोकस बच्चों और महिलाओं पर है, क्योंकि ये समूह एनीमिया के सबसे अधिक शिकार होते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य है कि समुदायों में पोषण की कमी को दूर किया जाए और लोगों को समय पर सही जानकारी दी जाए।

सरकारी और एनजीओ साझेदारी

लंबे समय तक बदलाव लाने के लिए डैनोन इंडिया सरकारी संस्थाओं और एनजीओ के साथ साझेदारी कर रहा है। यह पहल एनीमिया मुक्त भारत जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को समर्थन देती है। इन सहयोगों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विज्ञान-आधारित पोषण शिक्षा बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचे और देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों को मजबूती मिले।

नेतृत्व का दृष्टिकोण

डैनोन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री शशि रंजन ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य है देश की सबसे बड़ी पोषण संबंधी चुनौतियों में से एक को हल करके लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालना। उन्होंने बताया कि ‘आयरन अप!’ अभियान के माध्यम से कंपनी भारत में आयरन की कमी की कहानी को देर से पहचानने से बदलकर जल्दी रोकथाम की ओर ले जाना चाहती है। इसके लिए जल्दी स्क्रीनिंग, बेहतर पोषण जागरूकता और सरकार के एनीमिया मुक्त भारत मिशन का समर्थन किया जा रहा है।

निष्कर्ष

‘आयरन अप!’ अभियान भारत में आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया से लड़ने की दिशा में एक व्यापक और ठोस कदम है। यह पहल स्क्रीनिंग, चिकित्सकीय जागरूकता, डिजिटल शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी को जोड़कर एक ऐसा ढांचा तैयार कर रही है, जिससे आयरन की कमी को समय रहते पहचाना जा सके और सही पोषण के माध्यम से इसे रोका जा सके।

डैनोन इंडिया इस पहल के साथ देशभर के समुदायों का स्वस्थ भविष्य बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है—जहां जागरूकता समय रहते कार्रवाई में बदले और समय पर की गई कार्रवाई लंबे समय के बदलाव का मार्ग बनाए। यह अभियान केवल एक पहल नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो भारत को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

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